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1.
देश के कई अभयारण्यों में बाघों के सफलतापूर्वक पुनर्वास के बाद अब कंबोडिया में भी बाघों को बसाने की तैयारी है। भारत-कंबोडिया के बीच इसे लेकर समझौता हो चुका है। इसके तहत कंबोडिया से 2016 में विलुप्त हो चुके बाघों को फिर से बसाने में भारत न सिर्फ मदद देगा बल्कि उन्हें बाघ भी मुहैया कराएगा। इस दौरान बंगाल से छह बाघों को कंबोडिया को भेजने की योजना है। हालांकि यह तभी भेजे जाएंगे जब कंबोडिया में बाघ के लिए प्रस्तावित ठिकाना तैयार हो जाएगा। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक यह तैयार हो जाएगा। इसके साथ ही दुनिया में बाघों का यह एक देश से दूसरे देश में पुनर्वास का दूसरा मामला होगा। इससे पहले कजाकिस्तान में नीदरलैंड से बाघों को लाकर बसाया गया है।
2.
पहले यूक्रेन-रूस युद्ध और उसके बाद पश्चिम एशिया संकट ने विश्व में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर कई तरह के सवाल उठा दिए हैं। इन घटनाक्रमों ने कच्चे तेल और ईंधन की वैश्विक उपलब्धता पर गंभीर प्रभाव डाला है, जिससे कई देशों में उत्पादन व निर्यात प्रभावित हुआ है। ऐसे में भारत ने अपनी रिफाइनरी क्षमता को और गति देने के संकेत दिए हैं, जो ऊर्जा सुरक्षा व आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजस्थान के बाड़मेर (पचपदरा, बालोतरा) में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) की नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन करने जा रहे हैं।
3.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 से 11 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिनी यात्रा पर जा रहे हैं। जापान की पीएम सनाए ताकाइची के साथ शिखर सम्मेलन करने के बाद मोदी की तीन देशों की यह यात्रा भारत की हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर जारी कूटनीति, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता की मजबूती की दृष्टि से बेहद अहम साबित हो सकती है। इन देशों संग भारत संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहा है, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाने, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने, नई तकनीक और संसाधनों में साझेदारी विकसित कर वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक मुकाबला किया जा सके।
4.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने शुक्रवार को सेनाओं के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले विभिन्न खरीद प्रस्तावों के लिए 'आवश्यकता की स्वीकृति' यानी सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर दी। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, भारतीय सेना के लिए एंटी-यूएवी इलेक्ट्रानिक युद्धक प्रणाली 'आकाश तरंग', व्यक्ति द्वारा ले जा सकने वाली एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) प्रणाली, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) हथियार प्रणाली, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (वी-एसएचओआरएडीएस), टैंकों के लिए सक्रिय सुरक्षा प्रणाली और जेट-आधारित कैमिकेज ड्रोन प्रणाली की खरीद को मंजूरी दी गई है।
5.
महाराष्ट्र सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में अहम कदम उठाने जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यूसीसी से संबंधित कानून का मसौदा तैयार करने के लिए अगले दो हफ्ते के भीतर समिति का गठन किया जाएगा। हालांकि, समिति की संरचना व उसके कार्यक्षेत्र पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
6.
जापान की पीएम सनाए ताकाइची शुक्रवार को भारत की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी कर स्वदेश लौट गईं। इस मौके पर विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि इस यात्रा ने भारत और जापान की साझा प्रगति व समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी को और प्रगाढ़ करने की दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। दोनों देश अगले वर्ष राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे।
7.
अब जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध एक समझौते के साथ समाप्ति की ओर है, तो यह विश्लेषण करने का समय है कि इस युद्ध में किसे क्या मिला। हालांकि आम तौर पर जो देश युद्ध में शामिल नहीं होते, उन्हें दुनिया में युद्ध होना कभी पसंद नहीं आता, लेकिन इस बार अमेरिका को दुनिया भर से अभूतपूर्व विरोध का सामना करना पड़ा है। इस युद्ध के लिए शायद ही दोनों पक्षों को कोई वैश्विक समर्थन मिला, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ा, अमेरिका तेजी से अपने समर्थकों को भी खोने लगा
8.
केंद्र में सहकारिता मंत्रालय के गठित होने के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार द्वारा "सहकार से समृद्धि" के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए पूरे देश में 29 जून से छह जुलाई तक राष्ट्रव्यापी "सहकारिता सप्ताह" मनाया जा रहा है। इन पांच वर्षों में मंत्रालय ने कृषि, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों को मजबूत करने, पैक्स के कंप्यूटरीकरण, डिजिटल सहकारिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण स्तर पर अनाज भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
सहकारिता मंत्रालय के ये पांच वर्ष केवल प्रशासनिक उपलब्धियों के नहीं हैं, बल्कि ये भारत के ग्रामीण और वंचित समाज के आत्मविश्वास के पुनर्जागरण के वर्ष हैं। बिखरते और उपेक्षित पड़े सहकारी तंत्र को नीतिगत, कानूनी और तकनीकी संबल देकर उसे देश की मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बना दिया गया है। 'सहकार से समृद्धि' का महामंत्र भारत को आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर करते हुए देश के आर्थिक सपनों को पूरा करने का सबसे विश्वसनीय माध्यम सिद्ध हो रहा है। सामूहिकता की यह धारा आने वाले समय में भारत के स्वर्णिम कालखंड की सबसे प्रखर गाथा बनने जा रही है।
9.
दुनिया सहित भारत में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) को लेकर चिंता है। तमाम युवाओं को नौकरी का संकट नजर आता है। इस बीच नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट संभावना की वह राह दिखाती है, जहां विदेश में भारत के कुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। संभावनाओं को इन आंकड़ों से बल मिलता है कि वर्ष 2010-11 के मुकाबले वर्ष 2023-24 में रेमिटेंस (प्रवासी कामगारों द्वारा अपने देश को भेजी जाने वाली रकम) में दोगुना से अधिक वृद्धि हुई है। वैश्विक रेमिटेंस में भारत की हिस्सेदारी 2001 में 11 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में लगभग 14 प्रतिशत हो गई। यूनाइटेड नेशंस डिपार्टमेंट आफ इकोनामिक एंड सोशल अफेयर्स की 'इंटरनेशनल माइग्रेंट स्टाक 2024' रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत को 137.67 अरब डालर रेमिटेंस मिला, जो कि 2029 तक 160 अरब डालर तक पहुंचने का अनुमान है।
10.
सरकार का दावा है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद जून में अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति बरकरार है। मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर सर्विस सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन, जीएसटी संग्रह में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी, निर्यात में दहाई अंक की बढ़ोतरी, आटो बिक्री में तेजी के साथ सरकारी पूंजीगत खर्च में लगातार हो रहे इजाफे से जून की आर्थिक गतिविधियों में तेजी दिख रही है।
11.
वल्ड बैंक समू र्ल्ड बैंक समूह ने हाल ही में दुनियाभर के देशों के आय वर्ग के ताजा आंकड़े जारी किए हैं। इस वर्ष छह देश उच्च आय वर्ग की श्रेणी में शामिल हुए हैं। वहीं, पांच निम्न मध्यम आय वर्ग से उच्च-मध्यम आय वर्ग में चले गए हैं और एक निम्न आय वर्ग से निम्न मध्यम आय वर्ग में चला गया है। हालिया सालाना वर्गीकरण में कोई भी देश कम आय वाली श्रेणी में नहीं गया है। यह वर्गीकरण पिछले कैलेंडर वर्ष 2025 की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआइ) के आधार पर तैयार किया गया है।
12.
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आइआइपी) की तरह अब सेवा उत्पादन सूचकांक (आइएसपी) भी मासिक आधार पर जारी किया जाएगा। सांख्यिकी विभाग आगामी 14 जुलाई को पहली बार आइएसपी जारी करने जा रहा है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। सर्विस सेक्टर का निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है और अगले एक-दो साल में सर्विस सेक्टर का निर्यात वस्तु निर्यात को पार कर सकता है।
13.
वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बोर्ड आफ ट्रेड की बैठक में सभी राज्यों के औद्योगिक संगठनों से कहा कि वे अपने कारोबार में निर्यात को उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में एक लाख करोड़ डालर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य वस्तु और सेवा दोनों निर्यात को मिलाकर रखा गया है।
14.
भारत और फ्रांस ने शुक्रवार को दुर्लभ खनिजों, निवेश और वित्तीय संपर्क में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके फ्रांसीसी समकक्ष रोलैंड लेस्क्यूर ने भारत-फ्रांस आर्थिक और वित्तीय संवाद के दौरान इन मुद्दों पर चर्चा की।
15.
विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने चेतावनी दी है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल-नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकती है। इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में हीटवेव, सूखा, अत्यधिक बारिश और अन्य चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की आशंका है। डब्ल्यूएमओ की ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के दौरान अल-नीनो के मजबूत होने की संभावना है। संगठन का कहना है कि इसका असर वैश्विक मौसम पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।
16.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने एक 20 साल से ज्यादा पुराने टेलीस्कोप को बचाने के अभियान में जुट गई है। इस टेलीस्कोप को धरती पर गिरने से बचाने के लिए शुक्रवार को एक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट लांच किया गया है। अमेरिकन एयरोस्पेस कंपनी नार्थरोप ग्रुम्मन ने प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप से पेगासस राकेट का उपयोग करके कैटलिस्ट स्पेस टेक्नोलाजीज के लिंक स्पेसक्राफ्ट को लांच किया। उम्मीद है कि यह लगभग एक महीने में नासा के स्विफ्ट आब्जर्वेटरी नामक टेलीस्कोप के पास पहुंचकर उससे जुड़ जाएगा। 2004 में प्रक्षेपित यह टेलीस्कोप हालिया सौर तूफानों के कारण अपनी कक्षा से नीचे की ओर तेजी से गिर रहा है। नासा ने टेलीस्कोप को बचाने और उसे फिर से उसकी पहले की कक्षा में पहुंचाने के लिए कैटलिस्ट को तीन करोड़ डालर का भुगतान किया है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो स्विफ्ट सितंबर तक फिर से ब्रह्मांड में अपने मिशन को जारी कर सकता है।

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