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1.
ईरान-यूएई की तकरार में ब्रिक्स घोषणा पत्र पर फिलहाल संशय
भारत के पास जी-20 शिखर सम्मेलन का अनुभव है, जब भारी मतभेदों के बावजूद अंतिम क्षणों में समझौता प्रपत्र पर सहमति बन गई और समय पर इसे जारी कर दिया गया। वह अनुभव इस बार भी आजमाया जाएगा। वैसे ब्रिक्स में जी-20 जैसा वैचारिक ध्रुवीकरण नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट ने दो नए सदस्यों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ब्रिक्स के नए सदस्य हैं। पश्चिम एशिया संकट के बाद ये दोनों देश एक-दूसरे के घोर प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं। मार्च 2026 में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद ईरानी सेना ने यूएई स्थित अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए। यूएई इसे अपनी संप्रभुता पर हमला कहता है।
2.
अरुणाचल प्रदेश भारत की एकता का अहम हिस्सा : उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत की एकता का अहम हिस्सा है और पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक्ट ईस्ट नीति के तहत देश की वृद्धि का एक प्रमुख चालक बनकर उभरा है। यह राज्य भारत की सीमाओं का "गर्वित रक्षक" है और इसका विकास देश की प्रगति से निकटता से जुड़ा हुआ है।
3.
नकली और घटिया बीजों पर होगी सख्ती, नया सीड एक्ट आएगा
नकली, मिलावटी एवं घटिया बीज बेचने वालों की अब खैर नहीं। किसानों को इससे होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार नया सीड एक्ट लाने जा रही है, जिसकी तैयारी अंतिम चरण में है। नए कानून में अमानक बीज बेचने वालों पर भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा का भी प्रविधान होगा। इस पर किसानों की राय भी ली जानी है। इसी क्रम में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को शीर्ष किसान संगठनों के साथ बैठक करेंगे।
4.
'न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं, बिना जानकारी वाले दावों पर आपत्ति'
न्यायतंत्र एक जीवंत लोकतंत्र की धड़कन है, जो तार्किक और रचनात्मक आलोचना से कभी मुंह नहीं मोड़ता। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संस्थागत जवाबदेही और आत्म-सुधार के लिए स्वस्थ और निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। हालांकि, यह सीमा रेखा बहुत स्पष्ट है फर्क चुप्पी और आलोचना का नहीं, बल्कि जिम्मेदार सार्वजनिक बहस और बिना सोचे-समझे थोपे गए अनगढ़ बयानों के बीच का है। बच्चों के कोमल मन और भविष्य पर बिना किसी तथ्य की पुष्टि के इस तरह की बातें थोपना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं है और न ही हो सकती है। लेकिन, ऐसी आलोचना सही मंच के जरिये और निष्पक्ष व तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए।
5.
ओडिशा के जंगल में मिले पांच नन्हें ओरंगुटान, तस्करी की आशंका
ओडिशा के बालेश्वर जिले में स्थित एक जंगल में पांच नन्हें ओरंगुटान पाए गए हैं। विलुप्तप्राय श्रेणी के दुर्लभ जीव माने जाने वाले ओरंगुटानों का भारत में पाया जाना लोगों को चौंका रहा है। भारत के जंगलों में ये प्राकृतिक रूप से नहीं मिलते हैं। इनका प्राकृतिक निवास इंडोनेशिया और मलेशिया के कुछ हिस्सों में है। हाल के वर्षों में इनकी संख्या में भारी कमी आई है। जाहिर है कि हजारों किलोमीटर दूर से खुद चलकर या तैरकर ये भारत नहीं आ सकते। ऐसे में आशंका है कि इन्हें किसी ने बाहर से लाकर यहां छोड़ दिया। इन दुर्लभ जीवों की तस्करी की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। वन विभाग सभी बिंदुओं पर जांच में जुटा है।
6.
देश के पहले स्वदेशी समुद्री अनुसंधान पोत 'सागर मंथन' का जलावतरण
केंद्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान मंत्री डा. जितेंद्र सिंह व उनकी पत्नी मंजू सिंह ने देश के पहले उन्नत स्वदेशी पोत ओआरवी सागर मंथन का बुधवार को वर्चुअल माध्यम से कोलकाता स्थित ऋषि बंकिम शिपयार्ड में जलावतरण किया। यह पोत भारत के समुद्री अनुसंधान को बढ़ावा और नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के लिए रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने इस पोत का निर्माण किया है।
7.
ब्रिक्स को नए आयाम देता भारत
नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर के बीच ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। इस साल अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मना रहे इस संगठन की यह शिखर बैठक उस कसौटी को निर्धारित करेगी कि तमाम भिन्नताओं के बावजूद यह मंच सदस्य देशों के बीच जमीनी सहयोग और व्यावहारिक समन्वय का माध्यम बन पाया है या नहीं? न्यूयार्क में 20 सितंबर, 2006 को संयुक्त राष्ट्र की बैठकों के बीच स्थापना के दौरान भले ही इसे लेकर बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं, लेकिन एक नई शुरुआत का रोमांच साफ महसूस हो रहा था। तब से लेकर अब तक इस संगठन का निरंतर विस्तारित हो रहा दायरा वास्तव में चकित करने वाला है। विश्व की लगभग आधी आबादी और जीडीपी में करीब 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ ब्रिक्स एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन बन चुका है।
8.
समय की विसंगति दूर करता भारत
एक देश, एक समय को केवल घड़ियों की सुइयों को मिलाने की कवायद समझना ठीक नहीं होगा। यह डिजिटल भारत की वह जरूरत है, जिसमें समय अब केवल दिन और रात का हिसाब रखने का माध्यम नहीं, बल्कि वित्तीय लेन-देन, संचार, ऊर्जा, परिवहन और राष्ट्रीय सुरक्षा की पूरी व्यवस्था का आधार बन चुका है। समय की एकरूपता जितनी अधिक होगी, इन प्रणालियों के बीच तालमेल और विश्वसनीयता भी उतनी ही मजबूत होगी। असल में यह पहल भारत के डिजिटल भविष्य को एक समय पर लाने की कोशिश है
9.
सही वक्त पर होंगे अमेरिका से डील पर हस्ताक्षर
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है और कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि समझौते पर उचित समय पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। किसी भी व्यापार समझौते में दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजार में कुछ विशेष रियायतें देना जरूरी होता है। बता दें कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल में कहा था कि अमेरिका द्वारा भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर शुल्क शर्तें देने के बाद ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते का ब्योरा घोषित किया जाएगा।
10.
गन्ना किसानों को समर्थन का मसला आस्ट्रेलिया ने डब्ल्यूटीओ में उठाया
आस्ट्रेलिया ने भारत की घरेलू गन्ना और चीनी नीतियों को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में स्पष्टीकरण मांगा है। उसने दावा किया है कि भारत ने 2018-19 से 2024-25 के दौरान गन्ने के लिए डब्ल्यूटीओ नियमों के तहत तय सीमा से काफी अधिक समर्थन दिया। डब्ल्यूटीओ के कृषि समझौते के तहत इस तरह का समर्थन गन्ने के कुल उत्पादन मूल्य के 10 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है।
11.
नौवहन की स्वतंत्रता व अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान हों प्राथमिकताएं : राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि सुरक्षित सुरक्षित समुद्री समुद्री रास्ते, नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और निर्बाध समुद्री व्यापार मुख्य प्राथमिकताएं बनी रहनी चाहिए क्योंकि ये हिंद महासागर क्षेत्र के विकास व समृद्धि के लिए बेहद आवश्यक हैं। राजनाथ तीन दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को कोलंबो पहुंचे थे और 38 वर्षों में श्रीलंका का दौरा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री हैं। इससे पहले 1988 में तत्कालीन रक्षा मंत्री केसी पंत ने श्रीलंका की यात्रा की थी।
12.
यूएनएससी में सुधार के लिए गंभीर प्रयास किए जाएंगे : महासभा अध्यक्ष
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने कहा कि वह सुरक्षा परिषद में अर्थपूर्ण सुधार के लिए बहुत गंभीरता से प्रयास करेंगे। मंगलवार (स्थानीय समय) को महासभा के अध्यक्ष के तौर पर शपथ लेने के बाद उन्होंने कहा, "अभी ऐसी स्थिति है जहां भरोसे की कमी है और संगठन को भविष्य के लिए खुद को तैयार करने के लिए और गहरे सुधार करने होंगे।" महासभा के अध्यक्ष के तौर पर सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका के बारे में उन्होंने कहा, "मैं इसे बहुत गंभीरता से लेता हूं।"
13.
ग्लोबल वार्मिंग में भारत का योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस !
वर्ष 2024 तक भारत का वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस से भी कम है। यह अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ और रूस जैसे प्रमुख उत्सर्जकों से तो कम है, लेकिन भारत वैश्विक तापमान बढ़ाने में ब्राजील, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया जैसे अन्य औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आगे है।

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