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1.
शुद्ध पेट्रोल या ई-10 पर लौटना अब संभव नहीं
देशभर से सैकड़ों वाहन चालकों की तरफ से गुणवत्ता को लेकर शिकायत करने के बावजूद केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ई-20 ईंधन (20 प्रतिशत एथनाल मिश्रित पेट्रोल) बेचने के फैसले को वापस लेने नहीं जा रही है। परोक्ष रूप से यह इस बात का स्पष्ट संदेश है कि शुद्ध पेट्रोल या ई-10 पर लौटना अब संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि पिछले कई वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एथनाल उत्पादन एवं संबंधित बुनियादी ढांचे में लगभग एक लाख करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का निवेश किया है। इसके तहत समर्पित एथनाल संयंत्र, डिस्टिलरी, भंडारण सुविधाएं और लाजिस्टिक्स नेटवर्क बनाए गए हैं। हालांकि सरकार माना है कि ई-20 ईंधन से वाहनों का माइलेज पांच प्रतिशत तक घट जाता है। साथ ही वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति के मद्देनजर ई-20 की लागत अधिक बताकर कीमत भी नहीं घटाने का संकेत दिया है।
2.
12% से अधिक अल्कोहल वाले कफ सीरप के लिए लेना होगा लाइसेंस
12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाला कफ सीरप बनाने के लिए अब लाइसेंस लेना होगा। स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसे कड़े नियामक दायरे में लाते हुए लाइसेंस से दी गई छूट वापस ले ली है। साथ ही अब बिक्री के लिए डाक्टर की पर्ची की जरूरत होगी। नशे के लिए कफ सीरप के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने में इससे मदद मिलेगी।
3.
न्यूजीलैंड पहुंचे मोदी, द्विपक्षीय संबंधों को गति देने पर होगा जोर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंच गए। यह किसी भारतीय पीएम की गत 40 वर्षों में न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा है। आकलैंड हवाई अड्डे पर न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर मित्रता और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का संदेश दिया।
4.
मानव-वन्यजीव संघर्षों से निपटने को अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चलेगा जागरूकता मिशन
मानव और वन्यजीवों के बीच तेज होते संघर्ष को देखते हुए इससे निपटने के लिए अब देश भर में जागरूकता अभियान चलेगा। यह मिशन मोड में ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में चलेगा। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को इसकी जरूरत बताई और इसके लिए क्षेत्र व प्रजाति विशिष्ट उपाय करने को कहा। उन्होंने कहा कि इससे समाज में वन्यजीवों को लेकर व्याप्त भय को दूर करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने अभयारण्यों के बाहर आने वाले बाघों, तेंदुओं और हाथियों के प्रबंधन के लिए विशेष नीति तैयार करने के भी निर्देश दिए।
5.
बंदरगाहों की सुरक्षा में सिर्फ लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसी काम करें: शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंदरगाहों की सुरक्षा में सिर्फ लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसी को ही काम पर लगाने पर जोर दिया है। पत्तन, पोत परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल संग बैठक कर पत्तन सुरक्षा ब्यूरो के गठन में हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए शाह ने बंदरगाहों पर सिर्फ सीआइएसएफ द्वारा प्रशिक्षित निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जरूरत बताई। इनके प्रशिक्षण के लिए पत्तन सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान की आधारभूत संरचना का उपयोग किया जा सकता है।
6.
"एक देश, एक चुनाव" के तहत हो सकते हैं 2029 के लोकसभा चुनाव
संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि एक साथ चुनाव कराने संबंधी विधेयकों की समीक्षा कर रही समिति ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है, जिससे "एक देश, एक चुनाव" सुधार को 2029 के आम चुनाव तक लागू किया जा सके। गोवा में समिति की दो दिनी बैठक से इतर पीपी चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अब तक जिन सिविल सोसाइटी के हितधारकों से परामर्श किया गया है, उनमें से 99 प्रतिशत ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य बार-बार होने वाले चुनावों के कारण होने वाले अनुमानित सात लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान को रोकना है।
7.
समय के अनुरूप बदली विदेश नीति
अपनी तीन देशों की यात्रा पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया और आस्ट्रेलिया में भारतीयों को संबोधित किया। इसके बाद वे न्यूजीलैंड में भी ऐसा करने वाले हैं। इसके पहले 28 जून को सेशेल्स की नेशनल असेंबली में उन्होंने अपने संबोधन में अगस्त 1770 में सेंट ऐनी द्वीप पहुंचे पांच भारतीयों का उल्लेख किया था। किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की संसद में पहली बार यह संदेश दिया कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल राजनयिक इतिहास से नहीं, बल्कि साझा सभ्यतागत स्मृतियों और भारतवंशियों की पीढ़ियों से निर्मित विश्वास से जुड़े हैं। यह केवल अतीत का स्मरण नहीं, अपितु भारत की बदलती विदेश नीति की उद्घोषणा थी। प्रधानमंत्री के इस संदर्भ को समझने के लिए गिरमिटिया इतिहास को समझना आवश्यक है। 1833 में ब्रिटिश संसद द्वारा दास प्रथा समाप्त किए जाने के बाद ब्रिटिश, डच और फ्रांसीसी उपनिवेशों में श्रमिकों का संकट उत्पन्न हुआ। इसका समाधान इंडेंटर्ड लेबर सिस्टम के रूप में निकाला, जिसमें एग्रीमेंट शब्द भोजपुरी-अवधी अपभ्रंश में 'गिरमिट' बन गया और अनुबंधित श्रमिक 'गिरमिटिया' कहलाए।
8.
संतुलित होता असंतुलित विकास
स्वतंत्रता के बाद की सरकारों की नीतियों के कारण भारत में आधारभूत संरचना के विकास का दायरा केवल दक्षिण भारत, महानगरों और बड़े शहरों तक सीमित रहा। परिणामस्वरूप कभी बड़े साम्राज्यों के केंद्र रहे उत्तर भारत के प्रमुख राज्यों के लिए 'बीमारू' शब्द का प्रयोग किया जाने लगा। 1980 के दशक में जनसांख्यिकीविद् आशीष बोस ने बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' कहा। यह अविकसित अर्थव्यवस्था, कमजोर अवसंरचना विकास, निर्धनता, निरक्षरता के परिणामस्वरूप जनसंख्या विस्फोट, उच्च शिशु-मृत्यु तथा दुर्बल स्वास्थ्य से ग्रस्त प्रदेशों की संरचनात्मक जड़ता के सांकेतिक बोधक के रूप में रहा। वास्तविकता में इस स्थिति का विस्तार उत्तर भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों तक रहा। जहां भारत की बड़ी आबादी विकास के पैमानों में पीछे रही। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार राज्यों के सहयोग से इन क्षेत्रों की बदहाली को दूर करने में बहुत हद तक सफल रही है।
9.
शिक्षा की गुणवत्ता
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फार डिस्ट्रिक्ट्स तथा यू-डाइस प्लस रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का प्रमाण है। देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में स्थान बनाना और हमीरपुर जिले का प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ जिला बनना गर्व का विषय है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से किए गए निवेश और लागू किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम प्राप्त किया है। हिमाचल की सबसे बड़ी ताकत गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, पर्याप्त शिक्षक उपलब्धता और विद्यार्थियों तक शिक्षा की सहज पहुंच है।
10.
जनसंख्या प्रबंधन की आवश्यकता
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार भारत की जनसंख्या लगभग 146 करोड़ है और विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 रह गई है, जबकि जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए 2.1 का स्तर आवश्यक माना जाता है। हालांकि बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्रजनन दर अभी प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर है, जबकि केरल, तमिलनाडु, दिल्ली जैसे राज्य इस स्तर से नीचे पहुंच चुके हैं। इसका अर्थ यह है कि भारत की चुनौती राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या विस्फोट नहीं, बल्कि क्षेत्रीय असमानता है।
11.
भारत-जापान-सेशेल्स की साझेदारी
आज हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक कूटनीति का केंद्र बिंदु बन चुका है। इस बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत किसी मूकदर्शक की भूमिका में नहीं, बल्कि एक सशक्त रणनीतिक और आर्थिक धुरी के रूप में उभर रहा है। पूर्व में उगते सूरज की भूमि जापान से लेकर दक्षिण में हिंद महासागर के रणनीतिक प्रहरी सेशेल्स तक, भारत की कूटनीति आज असीम, भविष्योन्मुखी और व्यावहारिक परिणामों पर आधारित है। यह तथ्य इन दोनों देशों के साथ भारत के प्रगाढ़ होते संबंधों के हर उस महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करता है, जो आने वाले समय में विश्व राजनीति की दिशा तय करेंगे।
12.
अमेरिका के लिए संदेश है चीन का बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण
चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में एक परमाणु चालित पनडुब्बी से लंबी दूरी तक मार करने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। यह परमाणु सक्षम हथियार प्रणाली का एक विरले परीक्षण था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का मिसाइल परीक्षण अमेरिका के लिए संदेश है।
13.
भारत-आस्ट्रेलिया खेल संबंधों में अहम भूमिका निभाएगा क्रिकेट
भारत और आस्ट्रेलिया के बीच राजनीतिक संबंध अभी तक ठीक-ठाक ही रहे हैं, लेकिन अब इनमें खेलों के जरिए और नई गर्माहट का दौर शुरू होगा। खेलों में भी जहां क्रिकेट अन्य देशों के साथ भारत के संबंध बेहतर करने में अहम भूमिका निभाता रहा है, वह यहां भी अपना रंग दिखाएगा। आस्ट्रेलिया दौरे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में अपने समकक्ष आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के साथ मिलकर जब दोनों देशों के बीच खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और खेल उद्योग में सहयोग बढ़ाने के लिए खेल सहयोग 'रोडमैप' जारी किया।
14.
चीन ने फिर से इस्तेमाल होने वाली राकेट तकनीक में अमेरिका को दी चुनौती
अमेरिका को चीन कई क्षेत्रों में चुनौती दे रहा है। अब उसने अंतरिक्ष क्षेत्र में भी वह क्षमता हासिल कर ली है, जो सिर्फ अमेरिका के पास थी। दरअसल, चीन ने शुक्रवार को लांग मार्च-10बी कैरियर राकेट के लांच के बाद आर्बिटल-क्लास रियूजेबल राकेट बूस्टर को पहली बार नियंत्रित रूप से वापस लाने में कामयाबी हासिल की। यह सफलता एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के दिसंबर 2015 में आर्बिटल-क्लास राकेट बूस्टर को सफलतापूर्वक वापस हासिल करने वाली पहली कंपनी बनने के एक दशक से भी अधिक समय बाद मिली है। स्पेसएक्स अब तक 600 से ज्यादा बार आर्बिटल राकेट को सफलतापूर्वक लैंड करा चुकी है। शुक्रवार का यह मिशन चीन के लिए कैरियर राकेट के पहले चरण को हासिल करने का पहला मौका था। लांग मार्च 10बी एक टू-स्टेज राकेट है, जिसकी ऊंचाई करीब 207 फीट यानी 63 मीटर है। इसका पहला स्टेज केरोसिन और लिक्विड आक्सीजन से चलता है, जबकि दूसरा स्टेज लिक्विड आक्सीजन और लिक्विड मीथेन का इस्तेमाल करता है।

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