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JANSATTA

1.

अमेरिका-ईरान में युद्धांत, खुलेगा होर्मुज

अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन तक जारी रहे युद्ध को समाप्त करने व होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है और दोनों देशों के बीच समझौते पर शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस घटनाक्रम से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है। समझौते का विस्तृत ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान और अमेरिका के अधिकारियों ने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद होर्मुज जलमार्ग को खोल दिया जाएगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर बाद में चर्चा होने की संभावना है। 


2.

रिकार्ड स्तर पर थोक महंगाई, मई में 9.68 फीसद

देश में महंगाई की उड़ान जारी है। ईंधन, विनिर्मित उत्पादों, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से थोक महंगाई दर मई में बढ़कर 9.68 फीसद हो गई, जो अप्रैल में 8.26 फीसद थी। थोक महंगाई में तेज वृद्धि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलमार्ग के प्रभावी अवरोध के कारण हुई, जहां से भारत अपने अधिकतर कच्चे तेल का आयात करता है। इसका असर खाद्य कीमतों पर भी पड़ा। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआइ) आधारित मुद्रास्फीति का मई का यह आंकड़ा 2022-23 आधार वर्ष वाली वर्तमान श्रृंखला में अब तक का सबसे अधिक स्तर है। 


3.

ऊर्जा सुरक्षा में समानता का सवाल

देश की सौर ऊर्जा क्षमता दुनिया के सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा कार्यक्रमों में शामिल है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि हरित ऊर्जा का लाभ केवल बड़े निवेशकों और चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित न रह जाए। यदि इस ऊर्जा का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक नहीं पहुंचा, तो नई ऊर्जा व्यवस्था भी पुरानी असमानताओं को दोहरा सकती है। यह आशंका भी बनी रहेगी कि जीवाश्म ईंधन आधारित व्यवस्था की खामियों का स्थान हरित ऊर्जा की नई कमियों से न भर दिया जाए। भारत की ऊर्जा यात्रा सुरक्षा से शुरू हुई थी। अब उसकी अगली मंजिल ऊर्जा न्याय होनी चाहिए। ऊर्जा केवल अर्थव्यवस्था का ईंधन नहीं, बल्कि समान अवसर, सामाजिक गरिमा और समावेशी विकास की आधारशिला भी है। 


4.

रूस व तालिबान में बढ़ती करीबी, बदल रहे समीकरण

रूस और तालिबान के बढ़ते रिश्ते अफगानिस्तान और आस-पास के क्षेत्र में बदलते हालात का संकेत हैं। रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने वहां से जुड़ी रूस की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दोहराया है। शंघाई सहयोग संगठन की सुरक्षा बैठक में उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान में 20 से अधिक संगठनों के 18,000 से 23,000 तक लड़ाके मौजूद हैं।सीरिया से लड़ाकों की धीरे-धीरे वापसी हो रही है और अफगानिस्तान व उसके पड़ोसी देशों में सिंथेटिक नशीले पदार्थों का उत्पादन और व्यापार बढ़ रहा है। उन्होंने माना कि तालिबान के नेतृत्व वाला इस्लामिक अमीरात इन चुनौतियों, खासकर लड़ाकों की मौजूदगी, से निपटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान की क्षमता सीमित है। इसलिए इन खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग जरूरी है। रूस की आतंकवादी संगठनों की सूची से तालिबान का नाम हटाना और जुलाई 2025 में उसे आधिकारिक मान्यता देना यूरेशिया की रणनीतिक स्थिरता में महत्त्वपूर्ण मोड़ था। इससे यह संकेत मिला कि क्षेत्र के देश तालिबान के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए अधिक तैयार हैं। हालांकि, इस साझेदारी को मजबूत करते समय मास्को को सावधानी बरतनी पड़ी है। इसका कारण बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की घोषणा के साथ-साथ अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ता तनाव है। 


5.

सदी का सबसे ताकतवर अल नीनो दे रहा है दस्तक

अल नीनो कुदरती तौर पर होने वाला ऐसा जलवायु चक्र है जो हर दो से सात साल में अपने आप उभरता है।

इसकी शुरुआत तब होती है जब उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली पूर्वी हवाएं (ट्रेड विंड) कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे प्रशांत महासागर में गर्म पानी जमा होने लगता है। गर्म होने वाले पानी का यह इलाका लगभग अमेरिका के बराबर होता है और यह सिर्फ एक ही क्षेत्र में होता है, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा सकता है। 


6.

संघर्ष और उत्पीड़न से 11.8 करोड़ लोग विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजंसी ने कहा है कि संघर्ष या उत्पीड़न के कारण लोगों का मजबूरी में विस्थापन एक दशक में पहली बार 2025 में कम हुआ। हालांकि, एजंसी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में चेतावनी दी कि 11.8 करोड़ लोगों का अपने घर या देश छोड़ने के लिए मजबूर होना अब भी चिंताजनक रूप से उच्च स्तर पर है।

एजंसी के अनुसार, 2025 के अंत तक संघर्ष, हिंसा या उत्पीड़न के कारण जबरन विस्थापित हुए लोगों की कुल संख्या 11.78 करोड़ थी। इस आंकड़े में शरणार्थी, शरण चाहने वाले, आंतरिक रूप से विस्थापित और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता वाले अन्य समूह शामिल हैं।  


7.

अमेरिका-ईरान समझौता

साठ दिनों की अग्निपरीक्षा में परमाणु मुद्दा अहम

युद्ध से ईरान को अभूतपूर्व भू-राजनीतिक लाभ प्राप्त हुए, जिससे परमाणु मुद्दे पर ईरान की सौदेबाजी की स्थिति मजबूत हुई। यह समझौता ज्ञापन, जो परमाणु मुद्दे को युद्ध से पहले की स्थिति में, यानी 27 फरवरी की स्थिति में ही रखता है। अमेरिका प्रतिबंधों के जरिए ईरान को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से प्रभावी रूप से बाहर कर दिया है। हाल में आपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान नतान्ज, इस्फहान और फोर्दो में ईरान के परमाणु संवर्धन और प्रसंस्करण ढांचों को गंभीर क्षति पहुंचाई। इससे ईरान का 60% संवर्धित यूरेनियम भंडार मलबे में दब गया। लेकिन ईरान ने होर्मुज पर नियंत्रण और मिसाइलों व ड्रोन के जरिए अमेरिकी बढ़त को कम करने में कामयाबी हासिल की। 


8.

भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर अगले सप्ताह करेंगे बातचीत

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आएंगे। इस दौरान वह 23-24 जून को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, उम्मीद है कि चर्चा का केंद्र समझौता रूपरेखा को अंतिम रूप देना होगा, जिस पर उनके (अमेरिकी) प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा के दौरान विचार-विमर्श हुआ था। इसके साथ ही व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर भी चर्चा होगी, जिस पर दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत जारी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के 22 जून को नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है। इससे पहले, प्रमुख वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में अमेरिकी दल ने दो से चार जून को भारतीय अधिकारियों के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के मकसद से बातचीत की थी। 


9.

पहली बार उत्पादक मूल्य सूचकांक के आंकड़े जारी

सरकार ने सोमवार को पहली बार वस्तुओं और सेवाओं के लिए उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआइ) के आंकड़े जारी किए। इससे कीमतों में होने वाले बदलाव का सटीक आकलन करना संभव होगा। इससे अगले पांच वर्षों में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआइ) को चरणबद्ध ढंग से हटाने की राह आसान होगी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि यह कदम उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के व्यवहार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसमें भारत को डब्ल्यूपीआइ की जगह पीपीआइ को अपनाने की जरूरत पर बल दिया गया था। मंत्रालय के मुताबिक, कच्चे माल (इनपुट) और तैयार उत्पाद (आउटपुट) दोनों तरह के पीपीआइ के उपलब्ध होने से उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और तैयार उत्पादों की कीमतों में बदलाव को समझने में और सहूलियत होगी। 


10.

निर्यात मई में 45.2 अरब डालर के छह माह के उच्च स्तर पर, व्यापार घाटा बढ़ा

देश का निर्यात मई में 18 फीसद बढ़कर छह महीने के उच्च स्तर 45.2 अरब अमेरिकी डालर पर पहुंच गया। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में वृद्धि से व्यापार घाटा 28.21 अरब डालर तक बढ़ गया। मासिक आधार पर हालांकि व्यापार घाटा अप्रैल के 28.38 अरब डालर से मामूली घटा है। पिछले वर्ष मई में व्यापार घाटा 21.88 अरब डालर था। 


11.

देश में बेरोजगारी दर मई में मामूली रूप से घटकर 5.5 फीसद रही

देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के बीच बेरोजगारी की दर मई, 2026 में मामूली रूप से घटकर 5.5 फीसद रह गई, जो एक साल पहले 5.6 फीसद थी। सोमवार को जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से यह जानकारी सामने आई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की तरफ से जारी सर्वेक्षण आंकड़ों के मुताबिक, बेरोजगारी दर सालाना आधार पर भले ही कम हुई है लेकिन अप्रैल, 2026 के 5.2 फीसद के मुकाबले इसमें कुछ बढ़ोतरी हुई है। सर्वेक्षण के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मई में बढ़कर 5.1 फीसद हो गई, जो अप्रैल में 4.6 फीसद थी। 


12.

रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता व आतंकवाद-रोधी सहयोग समेत 11 समझौते पर हुए हस्ताक्षर

भारत और स्लोवाकिया ने सोमवार को अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक ले जाने तथा द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा सहयोग व एआइ (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री राबर्ट फिको के बीच बातचीत के बाद यह सहमति बनी। दोनों देशों ने इसी के साथ प्रवासन, डिजिटल प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए 11 समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह और कांसुलर वार्ता की स्थापना पर भी सहमति बनी। दोनों नेता भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द लागू करने की दिशा में काम करने पर भी सहमत हुए। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। 


13.

होर्मुज जलमार्ग खुलने से भारत को तेल आपूर्ति में मिलेगी राहत

होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने या इसके फिर से खुलने से भारत जैसे दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातक देश को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होंगी, माल ढुलाई लागत घटेगी और महंगाई पर दबाव भी कम होगा। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकीर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति/परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर जैसे प्रमुख खाड़ी उत्पादकों के लिए मुख्य निर्यात मार्ग है जो भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी हैं। डीआरडीओ ने सतह पर हमला करने वाली मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सतह पर हमला करने वाली लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल (एलआरएलएसीएम) का ओड़ीशा तट पर सोमवार को सफल उड़ान परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि विभिन्न निगरानी उपकरणों द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरी तरह हासिल हुए। एलआरएलएसीएम स्वदेशी रूप से विकसित की गई मिसाइल है, जिसकी सभी उप-प्रणालियों का विकास डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और औद्योगिक साझेदारों ने किया है। एरोनाटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीए), बंगलुरु इस परियोजना की प्रमुख प्रयोगशाला है।


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