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1.
फ्रांस के शहर एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को एक संक्षिप्त मुलाकात हुई। फरवरी, 2025 में वाशिंगटन में हुई पिछली बैठक के लगभग 16 महीने बाद उनकी यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है। दोनों नेताओं की यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के काल में मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात भारत और अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में भी अहम मानी जा रही है।
2.
पूरे देश में डाक्टर की पर्ची के बिना कोई भी सीरप नहीं मिलेगा। इनमें कफ सीरप भी शामिल हैं। पिछले वर्ष कफ सीरप पीने से मध्य प्रदेश और राजस्थान में दो दर्जन से अधिक मौतों के बाद सरकार कफ सीरप की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए उन्हें सख्त निगरानी के दायरे में लाई है। इसके लिए 1945 के ड्रग्स नियमों में बदलाव किया गया है। पहले एक हजार से कम आबादी वाले गांवों में खुदरा बिक्री लाइसेंस के प्रविधानों का पालन किए बिना कफ सीरप की बिक्री की अनुमति थी, जिसे अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। निगरानी व्यवस्था दुरुस्त बनाने के लिए पहले ही आदेश दे दिया गया था।
3.
मुफ्त बिजली और कृषि सब्सिडी का बढ़ता बोझ राज्यों के खजाने पर करारा प्रहार कर रहा है। राजस्व व्यय में सब्सिडी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ना कई राज्यों के वित्तीय प्रबंधन के लिए गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है। नियंत्रक व लेखा परीक्षक (कैग) की तरफ से मंगलवार को राज्यों के वित्त पर जारी रिपोर्ट 'स्टेट फाइनेंस 2024-25' के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में राज्यों का कुल सब्सिडी व्यय 4,37,326 करोड़ रुपये रहा, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र की सब्सिडी अकेले 1,89,802 करोड़ रुपये (43.40 प्रतिशत) है। ऊर्जा और कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां मिलकर कुल सब्सिडी का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं।
4.
2027 की जनगणना का पहला चरण 'घर सूचीकरण और आवास जनगणना (एचएलओ)' अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है। पहली बार यह प्रक्रिया डिजिटल हो रही है, जिसमें गणक जानकारी एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके एकत्र कर रहे हैं।
5.
भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक मार करने वाले स्वदेशी कामिकेज ड्रोन विकसित करने की एक परियोजना शुरू की है। मानवरहित कामिकेज वन-वे अटैक ड्रोन (आत्मघाती ड्रोन) को भारतीय उद्योग संग मिलकर विकसित किया जाएगा।
6.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मानसून पर अलनीनो के खतरे की आशंका के मद्देनजर जिला-स्तरीय आपातकालीन योजनाएं बनाने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार, अलनीनो का उप्र, मध्य प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान,, झारखंड और महाराष्ट्र समेत 12 राज्यों में गंभीर असर पड़ सकता है। अलनीनो मौसम संबंधी घटना है। यह भारत के लिए चिंता का कारण है क्योंकि इससे मानसून कमजोर पड़ जाता है।
7.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और राज्यों से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें आधार कार्ड का नागरिकता, रहने की जगह और घर के पते के सुबूत के तौर पर दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। याचिका में इसके उपयोग को सिर्फ पहचान के सत्यापन के लिए सीमित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
8.
उत्तर प्रदेश का बलिया स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ अब अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय पहचान के लिए भी जाना जाएगा। इसको नई पहचान दिलाई है प्रकृति, जैव विविधता और स्थानीय संस्कृति के जीवंत संसार ने। दरअसल, जिले के जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहाताल) को देश के 100वें रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिलने से यह आर्द्रभूमि वैश्विक स्तर पर चर्चित हुई है। यह केवल बलिया की भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और जीवन के सामंजस्य का ऐसा जीवंत प्रतीक है, जहां प्रत्येक मौसम एक नई कहानी कहता है। परिंदों की उड़ान, लुभाती जलराशि और हरियाली का विस्तार यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के और करीब ले जाता है।
9.
फ्रांस में जी-7 की बैठक के चलते विश्व का ध्यान उन्नत अर्थव्यवस्थाओं और लोकतंत्र वाले देशों के इस संगठन की ओर जाना स्वाभाविक है। वैसे तो इस संगठन के सदस्य देशों में अमेरिका के अतिरिक्त ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान भी शामिल हैं, लेकिन कुल मिलाकर इस पर अमेरिका का ही दबदबा रहता है। प्रति वर्ष जब भी जी-7 देशों की बैठक होती है तो यह संगठन चर्चा में तो आता है, लेकिन अभी तक का अनुभव यही बताता है कि वह कोई विशेष प्रभाव नहीं छोड़ पाता।
10.
अमेरिका और ईरान दोनों की घरेलू राजनीति इस समझौते के भविष्य को प्रभावित करेगी। अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों ने समझौते के बारे में अधिक जानकारी मांगी है। कई सांसद इससे असंतुष्ट हैं कि कांग्रेस को भरोसे में नहीं लिया गया। ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल भले ही एक कूटनीतिक गुंजाइश बनाई हो, लेकिन इसे स्थायी समझौते में बदलने के लिए उसे गहरे राजनीतिक विभाजन से जूझना पड़ेगा। ट्रंप के लिए यह समझौता राजनीतिक दृष्टि से लाभकारी कहा जा सकता है। मध्यावधि चुनावों से पहले जारी युद्ध, तेल की ऊंची कीमतें और अनिश्चित परिणाम उनकी राजनीतिक संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते थे। इसके विपरीत यह समझौता उन्हें एक निर्णायक और शांति स्थापित करने वाले नेता के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर देता है। उनके समर्थक इसे सैन्य दबाव के परिणाम के रूप में देख सकते हैं, जबकि आलोचक यह सवाल उठाते रहेंगे कि क्या यह युद्ध कभी आवश्यक था भी या नहीं।
11.
सुधीर कुमार हार्नबिल महोत्सव को देश का पहला 'कार्बन न्यूट्रल' उत्सव का दर्जा प्रदान किया गया है। नगालैंड की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और संवर्द्धन पर केंद्रित इस पर्व ने पर्यावरण-अनुकूल आयोजन की भावना को आत्मसात करके यह संदेश दिया है कि शून्य अपशिष्ट उत्पादन, एकल प्लास्टिक का उपयोग रोककर तथा पुनर्चक्रण के जरिये सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन पर्यावरण के हित में किया जा सकता है। नगालैंड सरकार द्वारा हार्नबिल महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2000 में की गई थी। इसका उद्देश्य नगा जनजातियों के बीच आपसी मेलजोल को प्रोत्साहित करते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना था।
12.
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव करवाना पाकिस्तानी नियंत्रण को वैध ठहराने का जरिया भर है। पाकिस्तान ने इसका उपयोग चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने तथा स्वयं को एक भू-राजनीतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करने के लिए करता है। पाकिस्तान वर्ष 1963 में चीन के साथ जमीन रणनीतिक समझौते के तहत पाकिस्तान ने बेहद महत्त्वपूर्ण शक्सगाम घाटी का 5,180 वर्ग किमी का क्षेत्र चीन को सौंप दिया। इसी समझौते की वजह से काराकोरम हाईवे और चीन पाकिस्तान इकोनमिक करिडोर (सीपीईसी) का रास्ता भारत के लिए चुनौती बना हुआ है। पीओजेके पर पाकिस्तानी सेना का कब्जा व चीन की बढ़ती दखलअंदाजी भारत के लिए सुरक्षा चिंताएं प्रस्तुत कर रही हैं।
13.
अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध विराम के एलान के बाद जुल्द ही अमेरिका से व्यापार समझौता होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को दूसरा बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है। आगामी 23-24 जून को यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर भारत आ रहे हैं और इस दौरान अमेरिका के साथ पहले चरण के व्यापार समझौते से जुड़े दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा सकता है। ग्रीर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक करेंगे। दोनों देशों के बीच पहले चरण का व्यापार समझौता करने को लेकर फरवरी में ही सहमति बन चुकी थी। समझौते पर हस्ताक्षर के लिए अंतिम दस्तावेज तैयार करने का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। अमेरिका भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है और देश का 20 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है। व्यापार समझौता होने से अमेरिका में रोजगारपरक सेक्टर का निर्यात मात्र एक से दो साल में दोगुना हो सकता है जिससे मैन्यूफैक्चरिंग व रोजगार दोनों बढ़ेंगे।
14.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में यमुना की सहायक नदी टॉस पर बनने वाली 422 मेगावाट की किशाऊ बांध परियोजना को लेकर गतिरोध समाप्त हो गया। आठ साल से लंबित परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने को स्वीकृति दे दी है। अब अंतिम स्वीकृति के लिए इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बनेगी। इससे संबंधित छह राज्यों को न केवल पानी और बिजली मिलेगी, बल्कि यमुना नदी में जलस्तर बढ़ने से नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने में भी मदद मिलेगी।
15.
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत (पीएम-वीबीआरवाई) के तहत 18 लाख से ज्यादा महिलाओं समेत लगभग 60 लाख पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को फायदा हुआ है। यह योजना केंद्र की रोजगार लिंक्ड इंसेंटिव (ईएलआइ) स्कीम है जो 1 अगस्त, 2025 से चालू है। इस स्कीम के फ़ायदे 31 जुलाई, 2027 तक लागू रहेंगे। इस योजना को श्रम और रोजगार मंत्रालय ने ईपीएफओ के जरिये लागू किया था। 99,446 करोड़ रुपये के खर्च के साथ इस योजना का मकसद दो साल में देश में 3.5 करोड़ से ज़्यादा नौकरियों के सृजन को बढ़ावा देना है।
16.
जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत एवं कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में जो टकराव आया था, वह तकरीबन पूरी तरह खत्म हो चुका है। इस बात के संकेत फ्रांस में हो रही जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच द्विपक्षीय बैठक से मिले। बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा को एक मित्र देश बताया और कहा कि दोनों देशों के संबंधों में अच्छी प्रगति हो रही है। पिछले एक वर्ष के भीतर मोदी और कार्नी के बीच चार बैठकें हो चुकी हैं।
17.
भारत ने कहा है कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के केवल अस्थायी श्रेणी का विस्तार किया जाता है तो यह अपने उद्देश्य में विफल माना जाएगा। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सोमवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता की बैठक में यह बात कही। कहा, अगर सुरक्षा परिषद का विस्तार सिर्फ अस्थायी सदस्यता श्रेणी तक सीमित रहा तो यह सुधार न सिर्फ अपर्याप्त होगा बल्कि विफल भी माना जाएगा।

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